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योगी सरकार का बड़ा कदम: डॉ भीमराव अंबेडकर सामाजिक परिवर्तन स्थल में लाइट एंड साउंड शो शुरू, क्यों खास है ये कदम?

Reported By: Ruchi Kumar, Edited By: Subhash Kumar
Published : May 06, 2026 01:13 pm IST,  Updated : May 06, 2026 01:13 pm IST
योगी आदित्यनाथ सरकार ने यूपी की राजधानी लखनऊ के डॉ भीमराव अंबेडकर सामाजिक परिवर्तन स्थल में लाइट एन्ड साउंड शो शुरू किया है। शो में डॉ अम्बेडकर के बचपन, शिक्षा, संघर्ष और संविधान निर्माण तक के सफर को लाइट, साउंड और विजुअल इफेक्ट्स के जरिये दिखाया जाएगा।
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योगी आदित्यनाथ सरकार ने यूपी की राजधानी लखनऊ के डॉ भीमराव अंबेडकर सामाजिक परिवर्तन स्थल में लाइट एन्ड साउंड शो शुरू किया है। शो में डॉ अम्बेडकर के बचपन, शिक्षा, संघर्ष और संविधान निर्माण तक के सफर को लाइट, साउंड और विजुअल इफेक्ट्स के जरिये दिखाया जाएगा।
लखनऊ के डॉ भीमराव अंबेडकर सामाजिक परिवर्तन स्थल में शुरू किए गए लाइट एंड साउंड शो में डॉ अंबेडकर के बचपन, उनकी शिक्षा, जीवन के संघर्ष और संविधान निर्माण तक के सफर को लाइट, साउंड और विजुअल इफेक्ट्स के जरिये दिखाया जाएगा।
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लखनऊ के डॉ भीमराव अंबेडकर सामाजिक परिवर्तन स्थल में शुरू किए गए लाइट एंड साउंड शो में डॉ अंबेडकर के बचपन, उनकी शिक्षा, जीवन के संघर्ष और संविधान निर्माण तक के सफर को लाइट, साउंड और विजुअल इफेक्ट्स के जरिये दिखाया जाएगा।
लखनऊ विकास प्राधिकरण ने करीब साढ़े अठारह करोड़ की लागत से ये प्रोजेक्ट तैयार कराया है। मायावती जब 1995 में पहली बार यूपी की मुख्यमंत्री बनीं तब उन्होंने इस पार्क की आधारशिला रखी थी। तब इस पार्क का नाम डॉ भीमराव अंबेडकर उद्यान था। बाद में इसका नाम डॉ भीमराव अंबेडकर सामाजिक परिवर्तन स्थल रख दिया गया। बाद में 2007 में यूपी में बहुमत की सरकार बनाने के बाद मायावती ने इसे और भव्य बनाया। पार्क में डॉ अंबेडकर के अलावा दलित महापुरुषों- ज्योतिबा फुले, नारायण गुरु, शाहूजी महाराज की मूर्तियां भी हैं।
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लखनऊ विकास प्राधिकरण ने करीब साढ़े अठारह करोड़ की लागत से ये प्रोजेक्ट तैयार कराया है। मायावती जब 1995 में पहली बार यूपी की मुख्यमंत्री बनीं तब उन्होंने इस पार्क की आधारशिला रखी थी। तब इस पार्क का नाम डॉ भीमराव अंबेडकर उद्यान था। बाद में इसका नाम डॉ भीमराव अंबेडकर सामाजिक परिवर्तन स्थल रख दिया गया। बाद में 2007 में यूपी में बहुमत की सरकार बनाने के बाद मायावती ने इसे और भव्य बनाया। पार्क में डॉ अंबेडकर के अलावा दलित महापुरुषों- ज्योतिबा फुले, नारायण गुरु, शाहूजी महाराज की मूर्तियां भी हैं।
सरकार के इस कदम को दलित वोटों से जोड़कर देखा जा रहा है। यूपी में करीब 22 फीसदी दलित वोट हैं। 2014 के पहले ज़्यादातर दलित वोट मायावती की पार्टी बसपा को मिलता था। 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने बड़े पैमाने पर मायावती के दलित वोट में सेंध लगाई। अब मायावती की पार्टी का एक भी सांसद नहीं है और विधानसभा मे सिर्फ एक विधायक है।
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सरकार के इस कदम को दलित वोटों से जोड़कर देखा जा रहा है। यूपी में करीब 22 फीसदी दलित वोट हैं। 2014 के पहले ज़्यादातर दलित वोट मायावती की पार्टी बसपा को मिलता था। 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने बड़े पैमाने पर मायावती के दलित वोट में सेंध लगाई। अब मायावती की पार्टी का एक भी सांसद नहीं है और विधानसभा मे सिर्फ एक विधायक है।
हालांकि, 2024 के लोकसभा चुनाव में बड़ी तादाद में दलित वोट बीजेपी से खिसक कर इंडिया गठबंधन में चल गया और इंडिया गठबंधन यूपी में 80 लोकसभा सीटों में से 43 जीत गया और बीजेपी को सिर्फ 33 सीट मिली और सहयोगी दलों को तीन। लोकसभा चुनाव में एनडीए को दलितों में जाटवों का 24 फीसदी और गैर जाटवों का 29 फीसदी वोट मिला। इंडिया गठबंधन को दलितों में जाटवों का 25 फीसदी और गैर जाटवों का 56 फीसदी वोट मिला।
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हालांकि, 2024 के लोकसभा चुनाव में बड़ी तादाद में दलित वोट बीजेपी से खिसक कर इंडिया गठबंधन में चल गया और इंडिया गठबंधन यूपी में 80 लोकसभा सीटों में से 43 जीत गया और बीजेपी को सिर्फ 33 सीट मिली और सहयोगी दलों को तीन। लोकसभा चुनाव में एनडीए को दलितों में जाटवों का 24 फीसदी और गैर जाटवों का 29 फीसदी वोट मिला। इंडिया गठबंधन को दलितों में जाटवों का 25 फीसदी और गैर जाटवों का 56 फीसदी वोट मिला।
आपको बता दें कि अगले साल 2027 के शुरुआती महीनों में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव का आयोजन होना है। भाजपा पूरी ताकत के साथ चुनाव की तैयारियों में जुटी हुई है। इस चुनाव में बीजेपी की कोशिश है कि ज्यादा से ज्यादा दलित वोट पाया जा सके।
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आपको बता दें कि अगले साल 2027 के शुरुआती महीनों में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव का आयोजन होना है। भाजपा पूरी ताकत के साथ चुनाव की तैयारियों में जुटी हुई है। इस चुनाव में बीजेपी की कोशिश है कि ज्यादा से ज्यादा दलित वोट पाया जा सके।
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